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Showing posts from August, 2012

आजादी से जुड़े चंद लम्हों की दास्तां कहता तिरंगा

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विक्टोरिया पार्क मेरठ में कर्नल शहनवाज, पंडित जवाहर लाल नेहरु, सुचेता कृपलानी, आचार्य जेबी कृपलानी, कर्नल गणपत राम नागर -  1946 में कांग्रेस के आखिरी अधिवेशन का गवाह -  नेहरू, आचार्य कृपलानी और शख्श्यितों ने फहराया था तिरंगा         आजादी के समय की तमाम धरोहरें संग्राहलयों में संजोई गई हैं। जिसमें आजादी के समय के तमाम ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं। आजादी से जुड़े चंद लम्हों को एक धरोहर के रुप में मेरठ में भी रखा गया है। 23 नवंबर 1946 में आजादी के पहले मेरठ के विक्टोरिया पार्क में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन के दौरान फहराया गया 14 फीट चौड़ा और 9 फीट लंबा तिरंगा फहराया गया था। यह झंडा हस्तिनापुर निवासी देव नागर के पास किसी धरोहर से कम नहीं है। इस ऐतिहासिक झंडे से देश के चंद महत्वपूर्ण लोगों की यादें जुड़ीं हैं। जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु, शहनवाज खान, आचार्य कृपलानी और सुचेता कृपलानी के नाम झंडे के इतिहास से जुड़े हैं।          द्वितीय विश्वयुद्ध में आजाद हिंद फौज के मलाया डिवीजन के कमांडर रहे, स्...

पंजाब, कालका और तूफान मेल से हिल गई थी ब्रिटिश हुकूमत

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                   भारत में 1857 से 1947 तक के संघर्ष में भारतीय वीरंगनाआें के बिना आजादी का ख्वाब शायद अधूरा होता। जिन्होंने अपने तीव्र और कड़े संघर्ष से ब्रिटिश शासन की चूलें हिलाकर रख दी। देशभर में तमाम महिला क्रांतिकारियों के समानांतर मेरठ में भी कुछ वीरंगनाआ ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबाने पर मजबूर कर दिया था।             मेरठ में 1930 के दौर में प्रमुख महिला क्रांतिकारियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। उनके आजादी के संघर्ष आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। इन महिला क्रांतिकारियों के तेज संघर्ष को देखकर ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाकर रख दीं थीं। जिसे तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत की खुफिया रिपोर्ट में दर्ज किया गया है। इनके संघर्ष की तुलना ब्रिटिश काल की सबसे तेज गति में चलने वाली रेलगाड़ियों से किया जाता था। इसमें तूफान मेल, पंजाब मेल और कालका मेल के नाम से इन महिला क्रांतिकारियों की संघर्ष की गति को जनमानस ने शिद्दत के साथ महसूस किया।...